class="s-light site-s-light">     करीब 12 हजार महिलाओं की भीड़ और आरुषि निशंक की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस, क्या लक्सर में बदलने जा रहा BJP का टिकट समीकरण? - janwani express

लक्सर। रक्षाबंधन के मौके पर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि की ओर से आयोजित ‘रक्षा सूत्र’ कार्यक्रम में करीब 12 हजार महिलाओं की भीड़ ने लक्सर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी आरुषि निशंक का मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होना इस पूरे आयोजन को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना गया। हालांकि भाजपा की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन कार्यक्रम के बाद सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या लक्सर में भाजपा के टिकट को लेकर कोई नई पटकथा लिखी जा रही है?

लक्सर में भाजपा के सामने सबसे मजबूत दावेदारों में संजय गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से आता है। वह लगातार दो बार भाजपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा प्रत्याशी से करीब 11 हजार वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। लक्सर में भाजपा का करीब 24 हजार वोटों का परंपरागत आधार माना जाता है। इसके बावजूद पिछले चुनाव में मुस्लिम और दलित मतदाताओं के मजबूत ध्रुवीकरण के बीच बसपा प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल रहा। यही वजह है कि आगामी चुनाव में भाजपा के सामने सिर्फ टिकट का सवाल नहीं, बल्कि जीताऊ समीकरण तैयार करने की चुनौती भी है।

एक तरफ संजय गुप्ता, दूसरी तरफ ओमप्रकाश जगदम्बनि—क्या बन रहा है दो खेमों का मुकाबला?

लक्सर भाजपा की राजनीति में इस समय दो नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है—संजय गुप्ता और राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि। संजय गुप्ता लगातार दो बार भाजपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं और उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खेमे के करीब माना जाता है, जबकि ओमप्रकाश जमदग्नि को पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक खेमे से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में ‘रक्षा सूत्र’ कार्यक्रम में करीब 12 हजार महिलाओं की भीड़ और आरुषि निशंक की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है। हालांकि इसे सीधे तौर पर टिकट की दावेदारी या किसी खेमे के शक्ति प्रदर्शन से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन लक्सर में भाजपा के भीतर संभावित राजनीतिक मुकाबले की चर्चा जरूर तेज हो गई है। लेकिन लक्सर की राजनीति में इतना जरूर साफ है कि इस बार टिकट का फैसला सिर्फ दावेदार के नाम पर नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी समीकरण, पिछले चुनाव के नतीजे, मजबूत वोट आधार और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर होने वाला है। यही वजह है कि टिकट की दौड़ अब केवल दावेदारी नहीं, बल्कि सियासी समीकरणों और जीत की संभावनाओं की परीक्षा भी बनती नजर आ रही है।

अब लक्सर की सियासत का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा फिर संजय गुप्ता के अनुभव पर दांव लगाएगी या ओमप्रकाश जमदग्नि के जरिए नया चुनावी समीकरण तैयार करेगी? एक तरफ दो बार के विधायक संजय गुप्ता हैं, जिनके सामने पिछली हार और करीब 11 हजार वोटों का अंतर बड़ी चुनौती है, तो दूसरी तरफ ओमप्रकाश जमदग्नि हैं, जिनके ‘रक्षा सूत्र’ कार्यक्रम में उमड़ी करीब 12 हजार महिलाओं की भीड़ ने उनकी राजनीतिक सक्रियता को जरूर चर्चा में ला दिया है। ऊपर से आरुषि निशंक की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और सियासी रंग दे दिया है। हालांकि इसे टिकट का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि लक्सर में 2027 की लड़ाई का पहला अध्याय लिखना शुरू हो चुका है। अब देखना सिर्फ इतना है कि भाजपा की चुनावी पटकथा में पुराना चेहरा ही मुख्य किरदार रहता है या कोई नया नाम कहानी का रुख बदल देता है।

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