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    ईद मिलन कार्यक्रम बना पावर शो: चंद्रशेखर आज़ाद के अचानक दौरे से लक्सर की राजनीति में हलचल - janwani express

हरिद्वार/लक्सर। ईद मिलन जैसे सामाजिक कार्यक्रम इस बार लक्सर की सियासत का केंद्र बन गए, जब इकराम हसन बसेड़ी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद का अचानक पहुंचना राजनीतिक मायनों में बड़ा संदेश दे गया। एक तरफ जहां यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर इसे एक उभरते राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में जुटी भीड़ और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस कार्यक्रम को खास बना दिया।

फाइल फोटो विधायक मोहम्मद शहजाद एवं ताहिर हसन

इसी के समानांतर, लक्सर के मौजूदा विधायक मोहम्मद शहजाद द्वारा भी ईद मिलन कार्यक्रम आयोजित कर जिलेभर से लोगों को बुलाया गया। इसे उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया, जहां उन्होंने अपने जनाधार को मजबूत दिखाने की कोशिश की। हालांकि, वहीं इस कार्यक्रम में पुरानी कोर टीम की गैर मौजूदगी बहुत कुछ बयां कर गई।

दूसरी ओर, इकराम हसन बसेड़ी जैसे स्थानीय चेहरों की सक्रियता भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रही है। क्षेत्र में उनकी लगातार बढ़ती पकड़ और जनसमस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता उन्हें एक मजबूत स्थानीय नेता के रूप में स्थापित कर रही है। ऐसे में उनका मंच और उस पर चंद्रशेखर आज़ाद की मौजूदगी आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकती है।

फाइल फोटो चंद्रशेखर आजाद एवं इकराम हसन बसेड़ी

आपको बता दे कि लक्सर की राजनीति में दलित और मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। यही वजह है कि की सक्रियता को सीधे तौर पर इस समीकरण में नई एंट्री के रूप में देखा जा रहा है। खासकर युवाओं के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता उन्हें 2027 के चुनाव में “गेम चेंजर” बना सकती है। यदि यह समर्थन वोट में तब्दील होता है, तो पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बढ़ना तय माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद के संपर्क में क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली नेता भी हैं, जो भविष्य में पार्टी का दामन थाम सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो लक्सर ही नहीं बल्कि आसपास की विधानसभा सीटों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, एक साधारण दिखने वाला ईद मिलन कार्यक्रम इस बार लक्सर की राजनीति में बड़ा संदेश देकर गया है। जहां एक ओर बसपा ने अपने संगठन और जनाधार का प्रदर्शन किया, वहीं चंद्रशेखर आज़ाद की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में यह सियासी हलचल किस दिशा में जाती है और 2027 के चुनाव में कौन सा चेहरा वास्तव में “गेम चेंजर” बनकर उभरता है।

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