हरिद्वार। जन अधिकार पार्टी (जनशक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद अली इन दिनों हरिद्वार जिले की राजनीति में तेजी से सक्रिय नजर आ रहे हैं। करीब दो साल पहले गठित हुई उनकी पार्टी अब जिले में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि हरिद्वार की अधिकांश विधानसभा सीटों पर उसके कार्यकर्ता सक्रिय हैं और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है। बीते कुछ समय में सदस्यता अभियान और स्थानीय मुद्दों को उठाकर पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
वहीं आज़ाद अली खुद को एक मुखर मुस्लिम नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। वे लगातार मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। जिले भर में कई मुस्लिम लीडर जो कि वर्तमान में विधायक भी है मुसलमानों को एक करने की तो बात करते हैं लेकिन खुलकर मुस्लिम कियादत की बात करने से बचते हैं। उसके उलट आजाद अली कहना है कि जब तक ज्यादा तो मजबूत नहीं होगी बदलाव नहीं हो सकता। हरिद्वार जैसे जिले में, जहां कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, यह रणनीति उन्हें एक खास वर्ग में पहचान दिला रही है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आजाद अली को राजनीतिक अनुभव तो है लेकिन उन्हें राज्य स्तरीय राजनीतिक का अनुभव नहीं है जिसके जवाब में आजाद अली कहते हैं
जब से देश आजाद हुआ मुसलमान ने कांग्रेस का झंडा ठंडा उठा कर रखा और मैं भी अपने जीवन के बीस साल कांग्रेस पार्टी को दिए और विश्लेषण बताते हैं कि तमाम सेकुलर पार्टियों ने मुस्लिम और दलितों का वोट लेकर उनका ही शोषण किया। जितनी भी मुस्लिम बहुलक है उन पर मुस्लिम में कोई टिकट नहीं दिया जाता। हमारी पार्टी में भी सब धर्म के लोग हैं लेकिन हम उन सभी समुदाय की लीडरशिप की बात कर रहे हैं इनको अभी तक नजरअंदाज किया गया जाता रहा है। और जनता इन मुद्दों के साथ जुड़ रहे हैं जब तक किसी भी समुदाय का नेतृत्व नहीं होगा जब तक उसका विकास नहीं हो सकता। यही मेरा अनुभव है और इसी अनुभव के साथ में 2027 के चुनाव में जा रहा हूं।
दूसरी ओर, कांग्रेस लंबे समय से मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ बनाए हुए है, लेकिन हाल के वर्षों में उसमें गिरावट देखी जा रही है। भाजपा की पकड़ भले ही मजबूत है, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं में उसका प्रभाव सीमित माना जाता है, वहीं आगामी 2027 के चुनाव में चंद्रशेखर आजाद की पार्टी सपा भी उत्तराखंड में चुनाव लड़ेगी और संभव है बसपा की तरह असपा भी ज्यादातर मुस्लिम कैंडिडेट उतारेगी। ऐसे में यदि जन अधिकार पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में 10 से 15 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारती है, तो वह चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में यह पार्टी मुख्य दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
कुल मिलाकर, हरिद्वार में आज़ाद अली का राजनीतिक कद भले ही अभी शुरुआती दौर में हो, लेकिन उनकी सक्रियता यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में वे स्थानीय राजनीति में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी मौजूदगी मुस्लिम पॉलिटिक्स के पारंपरिक समीकरण को बदल पाती है या नहीं।
