देहरादून। उत्तराखंड में बीते तीन वर्षों में बने सभी अस्थाई एवं स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दिल्ली में राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया।
हल्द्वानी में यूपी के एक व्यक्ति को फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी होने के बाद यह कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री धामी ने चार घंटे चली बैठक में जाली दस्तावेजों के जरिए आधार, राशन कार्ड और निवास प्रमाणपत्र बनाए जाने की बढ़ती शिकायतों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाहरी व्यक्तियों को फर्जी तरीके से बसाया जाना राज्य की सुरक्षा और सामाजिक संरचना के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।
सीएम ने ऐसे सभी प्रमाणपत्रों की तत्काल जांच शुरू करने के आदेश दिए।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में दिल्ली में हुए हालिया आतंकी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि प्रदेश में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों की सघन जांच हो। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखने और राज्यव्यापी सत्यापन अभियान की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।
केंद्रीय रक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद बड़े फैसले
इससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। मुलाकात में उन्होंने
- देहरादून स्थित एयरफोर्स ऑडिट ब्रांच को यथावत रखने,
- तथा नंदा राजजात यात्रा रूट को सेना के हवाले न करने का अनुरोध भी किया।
बैठक में दिए गए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
सीएम धामी ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिए—
- आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्य तेज़ हों।
- ठंड से बचाव के लिए पुख़्ता इंतजाम किए जाएँ।
- शीतकालीन यात्रा को देखते हुए प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सड़क, पेयजल और पार्किंग सुविधाएँ मजबूत की जाएँ।
- ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पीएचक्यू में अलग विशेष टीम बनाई जाए।
- सरकारी अस्पतालों में महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञों की 100% तैनाती सुनिश्चित हो।
- दवाइयों और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
